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Pandit JiMaa Baglamukhi Puja Seva
॥ श्री बगलामुखी प्राकट्य एवं महिमा ॥

The Divine Mother Maa Baglamukhi

दस महाविद्याओं में आठवीं — स्तंभन, सत्य व अजेयता की परम अधिष्ठात्री देवी।

माता पीताम्बरा (बगलामुखी) दस महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या हैं, जिन्हें स्तंभन की देवी माना जाता है। तंत्र शास्त्र और चक्र विज्ञान के अनुसार, माता पीताम्बरा का मुख्य निवास स्थान मानव शरीर के स्वाधिष्ठान चक्र (नाभि केंद्र के पास) और मणिपुर चक्र (नाभि केंद्र) के बीच मुख्य रूप से माना जाता है, जहाँ से वे पीत (पीले) रंग की ऊर्जा और तेज का संचालन करती हैं। कुछ तांत्रिक ग्रंथों में उन्हें रीढ़ की हड्डी के मूल भाग (कुंडलिनी) और आज्ञा चक्र (तीसरी आंख) को जोड़ने वाली प्रकाश रेखा के रूप में भी देखा जाता है।

जब किसी साधक के भीतर माता पीताम्बरा की ऊर्जा का जागरण होता है, तो उसके मानसिक, शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर कई गहरे परिवर्तन आते हैं।

॥ ऊर्जा जागरण के बाद साधक में मुख्य परिवर्तन ॥

माता की ऊर्जा मुख्य रूप से 'स्तंभन' (रोकने या स्थिर करने की शक्ति) से जुड़ी है। इसलिए उनके जागरण के प्रभाव बहुत तीव्र और प्रत्यक्ष होते हैं:

  • वाणी में अचूक प्रभाव (वाक सिद्धि): साधक की वाणी में गजब का सम्मोहन और बल आ जाता है। वह जो कहता है, वह घटित होने लगता है। विरोधी उसकी बात के सामने निरुत्तर हो जाते हैं।
  • शत्रुओं और नकारात्मकता का स्तंभन: साधक के आंतरिक शत्रु (जैसे काम, क्रोध, लोभ, भय) और बाहरी शत्रु (विरोधी, तंत्र बाधाएं, बुरी नजर) पूरी तरह शांत हो जाते हैं। विरोधियों की बुद्धि और गति रुक जाती है।
  • अद्भुत मानसिक स्थिरता: साधक का मन अशांति और भटकाव से मुक्त हो जाता है। वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी चट्टान की तरह अडिग और शांत रहना सीख जाता है।
  • तेजस्वी आभा मंडल (Aura): साधक के चेहरे और शरीर पर एक पीलापन लिए हुए दिव्य तेज या सम्मोहन शक्ति दिखाई देने लगती है, जिससे लोग उसकी ओर आकर्षित होते हैं।
  • भय का पूर्ण नाश: माता पीताम्बरा की ऊर्जा जागृत होने पर साधक के भीतर से मृत्यु, बदनामी, या हार का डर हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है। वह अत्यंत साहसी बन जाता है।

॥ माँ बगलामुखी मूल मन्त्र ॥

ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥

आध्यात्मिक अर्थ: "हे दिव्य माँ बगलामुखी, स्वर्णिम बीज 'ह्लीं' से सुशोभित, हम आपकी शरण में हैं। समस्त नकारात्मक तत्वों की वाणी, गति व शत्रुतापूर्ण बुद्धि को स्तंभित करें; हमें मन की स्पष्टता व अटल सत्य प्रदान करें।"

पंडित जी से बात करें
Maa Baglamukhi — the divine mother, eighth of the Dash Mahavidyas
॥ पीताम्बरी देवी दर्शनम् ॥

माँ को पीताम्बर (पीला रंग) क्यों प्रिय है

१

हरिद्रा (शुद्ध हल्दी)

प्राकृतिक शुद्धिकरण, संक्रमण-रोधी गुण व समृद्धि का प्रतीक। अभिषेक, तिलक व आहुति में केवल हल्दी की जड़ व चूर्ण का ही प्रयोग किया जाता है।

२

पीली सरसों

हवन के दौरान नकारात्मक कंपन, टोना-टोटका, मानसिक आक्रमण व शत्रुतापूर्ण ग्रह प्रभावों को दूर करने का सर्वाधिक प्रभावी वानस्पतिक माध्यम।

३

पीला रेशम (पीताम्बर वस्त्र)

भक्त व यजमान पूजा के दौरान पीले असिलाई वस्त्र धारण करते हैं ताकि माँ बगलामुखी की सूक्ष्म ऊर्जा से सामंजस्य स्थापित हो सके।

मंदिर यात्रा व दर्शन दिशानिर्देश

आवश्यक आध्यात्मिक शिष्टाचार

schedule

दर्शन व आरती का समय

  • • मंगला आरती: प्रातः 05:30 बजे
  • • प्रातः पूजन व हवन: प्रातः 07:00 – 11:30 बजे
  • • मध्याह्न भोग व विश्राम: दोपहर 12:30 – 03:30 बजे
  • • सायं संध्या आरती व दर्शन: सायं 06:30 – 09:30 बजे
checkroom

भक्तों हेतु अनुशंसित वस्त्र

  • • पुरुष: पीला अथवा सफेद धोती-कुर्ता या पारंपरिक वस्त्र।
  • • महिलाएँ: पीली साड़ी, सलवार कमीज़ अथवा पारंपरिक परिधान।
  • • चमड़े की वस्तुएँ (बेल्ट, पर्स) कुंड क्षेत्र से बाहर रखें।
  • • मानसिक मौन बनाए रखें और मन ही मन "ह्लीं" का जाप करें।